सरकार शुरू से ही आत्मप्रचार में लगी रही। मुख्य सड़कों को बंद करके विभिन्न तरह के तमाशे किए गए। जहाँ सड़कों की मरम्मत की जरूरत थी, वहाँ मरम्मत छोड़कर सड़कों को विभिन्न रंगों से रंगने पर पैसे खर्च किए गए, जिसकी वजह से सड़कें चिकनी हो गईं और बरसात होते ही मोटरबाइक सवार सड़क पर फिसलकर गिरने लगे। उसी आत्मप्रचार में सरकार ने इस बार पूरे राज्य में 12,400 नए पूजा पंडालों को मंजूरी दे दी, जिसकी वजह से रास्ते और कम हो गए और भीड़ को काबू करना मुश्किल काम बन गया।
आत्मप्रचार में फंसी इस सरकार ने शुरू से ही एक एजेंडे के तहत वामदलों द्वारा लगाए जाने वाले प्रगतिशील पुस्तक बिक्री केंद्र को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। तरह-तरह के उपाय किए गए और पुलिस बल को इस काम में भी लगा दिया गया कि किसी भी तरह वामपंथी किताबें न बिकने पाएँ। पुलिस बल का एक हिस्सा तो इसी काम में लगा रहा, फलस्वरूप भीड़ नियंत्रण और जनता की सुरक्षा हाशिए पर चली गई।