प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
जन समाचार मंच
प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

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अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 19 अप्रैल 2026 • 12 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

केंद्र की मोदी सरकार ने बांग्लादेश से जूट खरीदना बंद कर दिया है और केंद्रीय वस्त्र मंत्री संसद में कहते है कि हमारे देश में जूट की कोई कमी नहीं है। दूसरी तरफ चल रहा है,जूट की जमाखोरी एवं काला बाजारी । JPM एक्ट 1987 का उल्लंघन करके सिंथेटिक बैग बनाने वाली कंपनियों को 10 लाख 75 हज़ार जूट बैग के ऑर्डर दिए गए हैं। असल में, हमारे देश में सिंथेटिक बैग बनाने वाली फैक्ट्री का मालिक कॉर्पोरेट पूँजीपति अंबानी है। जूट की कमी को दिखाते हुए, जूट मिल मालिक अपनी मर्ज़ी से मिलें खोल रहे हैं और गैर-कानूनी तरीके से मिलें बंद कर रहे हैं। मज़दूरों को वेतन, नुकसान का मुआवजा नहीं दी जा रही है, त्रिपक्षीय समझौता में तय हुआ कि जो मिलें चल रही हैं, जिनमें बंद मिलें भी शामिल हैं, लेकिन मज़दूरों को काम नहीं मिल रहा है, उन मज़दूरों को वेतन नुकसान का मुआवजा देना होगा।
श्रेया जायसवाल • 26 मई 2026
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