हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
मोहम्मद सलीम
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
"बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी " - मोहम्मद सलीम

फलता: तृणमूल कांग्रेस के अत्याचार के खिलाफ वामपंथियों ने लड़ाई लड़ी है और अब भाजपा के 'बुलडोजर राज' के खिलाफ भी वामपंथी ही अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वे तृणमूल कांग्रेस की तरह मैदान छोड़कर भागेंगे नहीं। शनिवार को फलता के फतेहपुर में सीपीआई (एम) द्वारा आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि नीति और विचारधारा न छोड़ने के कारण ही फलता की जनता ने भाजपा के खिलाफ लड़ाई में सीपीआई (एम) का समर्थन किया है। फलता के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस या कांग्रेस नहीं, बल्कि सीपीआई (एम) दूसरे स्थान पर उभरी है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए सीपीआई (एम) का संघर्ष जारी रहेगा।
इस कार्यकर्ता सभा में मोहम्मद सलीम ने फलता के चुनावी संघर्ष में वामपंथियों का साथ देने वाले सभी पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम जनता का अभिनंदन किया। शनिवार को सीपीआई (एम) फलता एरिया कमेटी द्वारा बुलाई गई बैठक में उन्होंने कहा कि धैर्य रखकर फलता में संगठन का विस्तार करना होगा। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा लोकतंत्र को खत्म करना चाहती थीं। हम लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं।
"पिछले पंद्रह वर्षों से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के नेता कह रहे थे कि दूरबीन से देखने पर भी सीपीआई (एम) नजर नहीं आती। असल में, वे सीपीआई (एम) सहित वामपंथियों को कोई भी बैठक, रैली या कार्यक्रम करने ही नहीं देते थे। अपराधियों और पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल करके जनता की आवाज को दबा दिया जाता था। लेकिन इस सबके बावजूद वे लाल झंडे को खत्म नहीं कर सके।"
लाल झंडा हाथ में थामे कार्यकर्ताओं ने धैर्य बनाए रखा और जान की बाजी लगाकर लड़ाई लड़ी। भाजपा चाहती थी कि तृणमूल कांग्रेस के जरिए बंगाल की धरती पर उनके असली दुश्मन— वामपंथियों—को खत्म कर दिया जाए। लेकिन अब तृणमूल कांग्रेस खुद खत्म हो रही है, जबकि वामपंथी साहस के साथ लड़ाई जारी रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में जनता को संगठित कर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए वामपंथी और बड़ी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि आतंक और अत्याचार के बीच भी फलता की जनता ने सीपीआई (एम) के प्रति अपना प्यार दिखाया है, क्योंकि हमने अपनी नीति और विचारधारा को नहीं छोड़ा। तृणमूल कांग्रेस का कोई राजनीतिक आदर्श नहीं था। गर्मी में बर्फ जिस तरह पिघलती है, तृणमूल उससे भी तेजी से पिघलकर गायब हो रही है। आफत तो टल गई, लेकिन अब आफत से बड़ी विपदा आ गई है। भाजपा सरकार में आते ही सबसे पहले गरीब लोगों पर बुलडोजर चला रही है।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि हमें हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस सभा को मोहम्मद सलीम के अलावा सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति के सदस्य शमीक लाहिड़ी, पार्टी के दक्षिण २४ परगना जिला सचिव रतन बागची और पार्टी नेता प्रभात चौधरी ने भी सम्बोधित किया। सभा का संचालन एरिया कमेटी के सचिव शंभूनाथ कुर्मी ने किया।
शमीक लाहिड़ी ने फलता की जनता का आभार जताते हुए कहा कि घोर अत्याचार के बीच भी वामपंथी मैदान छोड़कर नहीं भागे। हमें जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। वामपंथियों की यह लड़ाई बेरोजगारों को रोजगार दिलाने, कृषि विपणन (मार्केटिंग) को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराकर किसानों को धान की सही कीमत दिलाने और भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने के लिए है। भाजपा सरकार में आने के बाद भी इन मुद्दों पर चुप है। जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जनादेश देकर सरकार बदली है। अब जनता को साथ लेकर ही आंदोलन आगे बढ़ेगा।
रतन बागची ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए थे। हमारे कार्यकर्ता जब जेल से बाहर आए, तब भी कोई उन्हें 'चोर' नहीं कह सका। राजनीतिक हमलों का मुकाबला राजनीतिक संघर्ष से ही किया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को धोखा देकर उन्हें संकट में डाला है और भाजपा ने इसी का फायदा उठाकर लोगों के बीच नफरत फैलाई है। इसके खिलाफ लड़ने के लिए सभी मेहनतकश लोगों को एकजुट होना होगा।
फलता से अनिल कुंडू की रिपोर्ट
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साभार: गणशक्ति
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