वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
शनिवार, 29 अगस्त 2026 | Saturday, 29 August 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•17 जून 20263 मिनट पठन18 बार पढ़ा गया

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

तृणमूल कांग्रेस नाम का मुखौटा हटाकर आरएसएस का असली चेहरा सामने आ गया है। मुखौटा अब असली चेहरे से मिल रहा है। अब लड़ाई असली चेहरे से ही है। यह लड़ाई वामपंथ बनाम उग्र दक्षिणपंथ की है। माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मंगलवार को दो जनसभाओं में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि इस लड़ाई में वामपंथ ही जीतेगा। उन्होंने गरीब और मेहनती लोगों के खून-पसीने से बने उस लाल झंडे के संघर्ष को मजबूत करके इस राज्य की धरती पर फिर से एक नया इतिहास रचने का आह्वान किया।

मंगलवार को मटियाबुर्ज इलाके के बड़तला रेललाइन मोड़ पर आयोजित एक जनसभा में मोहम्मद सलीम ने भाषण दिया। इसके बाद, उसी दिन माकपा की कोलकाता पोर्ट-2 एरिया कमेटी के तत्वावधान में धानखेती बाजार के पास के इलाके में भी एक जनसभा में मोहम्मद सलीम ने अपनी बात रखी। दोनों जनसभाओं में उन्होंने कहा कि आरएसएस ने ममता बनर्जी को प्रोजेक्ट करके और इस राज्य में तृणमूल कांग्रेस नाम की पार्टी बनाकर सत्ता की गद्दी पर बैठने की जो रणनीति बनाई थी, धीरे-धीरे नकली विरोध का नाटक करते हुए आखिरकार वह चाल सफल हो गई है। आरएसएस के निर्देश पर बीजेपी को सत्ता के दायरे में लाने की जो कोशिश पिछले 15 सालों से चल रही थी, उसके सफल होते ही तृणमूल कांग्रेस अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बीजेपी में ही विलीन हो रही है।

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे। हमलों और मुकदमों के जरिए हमें दबाया नहीं जा सका है। नीति और विचारधारा के बल पर हमारी लड़ाई और आगे बढ़ रही है।

मोहम्मद सलीम ने आज राज्य की वर्तमान सरकार की जनविरोधी, कॉर्पोरेट और पूँजीपति तुष्टिकरण की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि लूटखसोट करने वालों के खिलाफ शोषितों की लड़ाई जारी रहेगी। गरीब हाकरों की रोजी-रोटी छीनने और लोगों के अधिकार व लोकतंत्र को नष्ट करने के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस फासीवादी, निरंकुश ताकत के खिलाफ वामपंथियों को ही लोगों को एकजुट करके लड़ाई और संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। मजदूर वर्ग आज इस निरंकुशता के खिलाफ एकजुट हो रहा है।

सभा में माकपा कोलकाता जिला सचिव कल्लोल मजुमदार ने कहा कि इस राज्य में मेहनती लोगों के हितों के लिए असली लड़ाई माकपा और वामपंथी ही लड़ रहे हैं। लोगों के हितों के लिए वामपंथियों के इस संघर्ष से घबराकर तृणमूल और बीजेपी, दोनों पार्टियों ने मिलकर तरह-तरह के भाषाई विभाजन की राजनीति के जरिए लोगों को समान रूप से गुमराह किया है। धर्मनिरपेक्षता की इस देश की परंपरा को तोड़कर, संविधान को नष्ट करके विभाजन और नफरत की गंदी राजनीति से लोगों की एकता और सद्भाव को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने इस कुप्रयास के खिलाफ लोगों से एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।

नेताओं ने कहा कि कोलकाता कॉर्पोरेशन के अस्थिर माहौल के कारण नागरिक सेवाएं और अधिक बदहाल न हों, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महंगाई के चंगुल में फंसकर गरीब और मध्यम वर्ग का जीवन जीना दूभर हो गया है। आज की इस सभा से मूल्य वृद्धि पर तुरंत नियंत्रण लाकर आम लोगों का जीवनयापन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। सभा का संचालन मोहम्मद जाकिर मोल्ला ने किया। मटियाबुर्ज की जनसभा में मणिरुल इस्लाम सहित अन्य नेताओं ने भी भाषण दिया।

.

.

साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

अपलोडर: श्रेया जायसवाल

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 17 जून 2026 • 3 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

321 क्लिक

2

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

312 क्लिक

3

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

304 क्लिक

4

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

273 क्लिक

5

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

269 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

पुस्तक विमोचन: मार्क्सवाद-मेरा संघर्ष पथ - लेखक: गणेश शंकर विद्यार्थी (संपादक:मृणालिनी)। आयोजक: सीपीआई (एम) बिहार राज्य कमिटी । मुख्य अतिथि: कॉमरेड डॉ. अशोक ढावले

मंगलवार, 01 सितंबर 2026 • 12:00 | राज्य कार्यालय, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी , जमाल रोड, पटना, - 800001, बिहार

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राज्य

हिंदू-मुस्लिम सभी बुलडोजर के शिकार होंगे: मोहम्मद सलीम

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी: मोहम्मद सलीम

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

14 जून 2026

अतिथि लेखन

फुटबॉल का कोई देश नहीं होता - शमीक लाहिड़ी

यह केवल एक खेल नहीं है, बल्कि इंसानी सामूहिक भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है। इसलिए मैदान के बाहर की इस कठिन लड़ाई में—पूंजी के फुटबॉल के खिलाफ इंसानी फुटबॉल की जीत होनी ही चाहिए। क्योंकि, गेंद का असली मालिक कोई बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेशन या अरबपति नहीं है; गेंद का असली मालिक वह बच्चा है, जो आज भी धूल-भरी गलियों में नंगे पैर पहली किक मारता है। सपनों की कीमत किसी मुद्रा में नहीं मापी जा सकती, और फुटबॉल का असली पता आज भी लोगों के दिलों में ही है।

शमीक लाहिड़ी

[लेखक सी पी आई (एम)के पूर्व सांसद और केंद्रीय कमेटी के सदस्य हैं।]

12 जून 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement