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शारदोत्सव के दौरान किताबों और किताबों के स्टॉलों पर हुए हमलों के विरोध में राज्य के शिक्षा और संस्कृति जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने समस्त नागरिक समाज को साथ लेकर एक अनूठे कार्यक्रम का आह्वान किया है। आगामी 29 अक्टूबर को कोलकाता में 'किताबों के लिए पदयात्रा' कार्यक्रम का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा है,
नागरिक समाज का यह विरोध मार्च आगामी 29 अक्टूबर, वृहस्पतिवार को दोपहर साढ़े तीन बजे आयोजित किया जाएगा। कॉलेज स्क्वायर के पुस्तक पाड़ा से होते हुए यह जुलूस विद्यासागर की मूर्ति के पास ही समाप्त होगा।
राज्य के कला, संस्कृति और साहित्य जगत के कई प्रतिष्ठित नागरिकों ने इस कार्यक्रम का आह्वान करते हुए एक बयान में कहा है,
"हमारे राज्य में दुर्गा पूजा या शारदोत्सव के दौरान लोग आनंद में सराबोर होते हैं। बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। पत्रिकाओं के प्रकाशन से आयोजनों की शुरुआत होती है, जिसके बाद धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ मेलों का प्रांगण, नाटक, संगीत, कविता और किताबों के स्टॉल होते हैं। यह एक पुरानी परम्परा है, और किताबों का बाजार इस आनंदोत्सव का अभिन्न अंग बन चुका है। हालाँकि, इस साल हमने स्तब्ध होकर देखा कि किताबों के स्टॉलों के खिलाफ किस तरह मनमाने ढंग से हमले किए गए। कई जगहों पर स्टॉल तोड़ दिए गए, आयोजकों पर हमले हुए, और किताबों को फाड़कर पैरों तले कुचला गया। यहाँ तक कि किताबों के स्टॉल तोड़ने के लिए भारी पुलिस बल और केंद्रीय बल बुलडोजर व कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ लेकर पहुँच गए। किताबों को कचरा समझ लिया गया! दुनिया भर में बंगाल की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। लेकिन साथ ही, हमने यह भी देखा कि कैसे महिलाओं, पुरुषों और हर उम्र के लोगों ने किताबों से प्रेम करते हुए इसका प्रतिरोध किया। स्टॉल तोड़ने आई पुलिस और बुलडोजरों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। पूरे राज्य में ऐसी अनगिनत घटनाएँ देखी गईं—एक तरफ किताबों के खिलाफ राज्य की लड़ाई थी, तो दूसरी तरफ किताबों से प्यार करने वाले अनगिनत लोगों का प्रतिरोध।"
उन्होंने आगे कहा, "हम जानते हैं कि किताबें ज्ञान का भंडार, चेतना का संचय और सभ्यता की संवाहक हैं। एक समय ऐसा था जब कोई सपने में भी यह नहीं सोच सकता था कि बंगाल के लोगों को यह दृश्य देखना पड़ेगा कि कुछ लोग किताबें फाड़ रहे हैं और उन्हें पैरों तले कुचल रहे हैं। अगर इस बीमारी को बढ़ने दिया गया, तो बंगाल की प्रतिष्ठा, बंगाली मूल्य और परम्पराएँ धूल में मिल जाएँगी। इसलिए, इस मूर्खतापूर्ण बर्बरता के विरोध में हम आगामी 29 अक्टूबर को 'किताबों के लिए पदयात्रा' शीर्षक कार्यक्रम का आह्वान करते हैं। किताब से प्यार करने वाले लोग कॉलेज स्क्वायर में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति के पास एकत्र हों। लोग वहीं से किताबों के लिए अपनी पदयात्रा शुरू करेंगे। कॉलेज स्क्वायर की पुस्तक गली का चक्कर लगाकर यह यात्रा विद्यासागर की मूर्ति के पास ही समाप्त होगी। हमारा अनुरोध है कि किताबों से प्रेम करने वाले इंसान के रूप में आप सभी इस कार्यक्रम में शामिल हों। लेखक, कलाकार, छात्र, शिक्षक और सभी पुस्तक प्रेमी इसमें आएँ। अपने साथ अपनी पसंद की कोई भी एक किताब जरूर लाएँ। आने वाली पीढ़ी और सभ्यता के लिए इस जन-प्रतिरोध के भागीदार और गवाह बनें। किताब ही किताबों के लिए हमारे विरोध का प्रतीक बने।"

इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करने वाले प्रमुख विशिष्ट व्यक्तियों में शिक्षाविद् पवित्र सरकार, लेखक शमिक बनर्जी और कुमार राना, अर्थशास्त्री रतन खासनबीस, प्रोफेसर शोभनलाल दत्तगुप्ता, प्रोफेसर अशोकनाथ बसु, सिद्धार्थ दत्त, रजत बंदोपाध्याय ,नाटककार चंदन सेन, अभिनेता सव्यसाची चक्रवर्ती, मेघनाद भट्टाचार्य, विभाष चक्रवर्ती, फिल्म निर्देशक कमलेश्वर मुखर्जी, नाट्य निर्देशक पौलमी चटर्जी और सौरव पालोधि, फिल्म विशेषज्ञ संजय मुखोपाध्याय ,लेखक शंकरलाल भट्टाचार्य, पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता, साहित्यकार स्वप्नमय चक्रवर्ती, तपन बनर्जी, पार्थजीत गांगुली, कवयित्री यशोधरा राय चौधरी और सेवानिवृत्त आईएएस जवाहर सरकार सहित कई गणमान्य लोग शामिल हैं।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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प्रकाशित: 25 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन

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