वोट चोरी, एसआईआर (SIR) के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन हो: दीपके
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जन समाचार मंच
वांगचुक के अनशन का दूसरा दिन: सीपीआई (एम) ने दिया साथ रहने का संदेश
सोमवार को सोनम वांगचुक के अनशन और विरोध प्रदर्शन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के लिए सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी और वरिष्ठ नेता वृंदा करात दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। इस दौरान एसएफआई के अखिल भारतीय संयुक्त सचिव और दिल्ली राज्य सचिव आइशी घोष भी उपस्थित थी।
मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले दो हफ्तों से जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' धरना दे रही है। रविवार से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। विरोध स्थल पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी मौजूद हैं। सीपीआई (एम) समेत अन्य वामपंथी दलों और संगठनों ने शुरुआत से ही युवाओं के इस स्वतःस्फूर्त आंदोलन का समर्थन किया है।
सोमवार को सीपीआई (एम) नेताओं ने सीधे अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष राणा समेत सीजेपी के प्रमुख चेहरों से मुलाकात की और आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं की मांगों का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली के गहरे संकट की अभिव्यक्ति है। मोदी सरकार की शिक्षा नीति की विफलता के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता के मुहाने पर खड़ा है।
सोमवार को सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स के जरिए अभिजीत दीपके ने नीट भ्रष्टाचार के कारण हाल ही में छात्रों द्वारा की गई आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने प्रदीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, आमायरा कुमार और कहान पटेल का नाम लेते हुए कहा कि इन छात्र-छात्राओं के परिवारों को न्याय के लिए 'भीख' मांगनी पड़ रही है। मोदी सरकार का कोई भी प्रतिनिधि अभी तक इन परिवारों से संपर्क कर दुख जताने नहीं आया है। दीपक ने कहा, "जो लोग सत्ता में हैं, वे इतने उदासीन और अहंकारी कैसे हो सकते हैं कि उन्हें अपनी संतान खोने वाले परिवारों से संपर्क करने की भी आवश्यकता महसूस नहीं होती? वे उनके बच्चों को वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन कम से कम दुख तो व्यक्त कर ही सकते हैं।"
इसी बीच सोनम वांगचुक का अनशन दूसरे दिन में प्रवेश कर गया है। लद्दाख के इस प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् ने शिक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्यावरण की रक्षा की मांग को लेकर अपना अनशन जारी रखा है। देशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा, "सीजेपी और लद्दाख के आम लोगों के समर्थन में यह मेरे अनशन का दूसरा दिन है। आप भी इसमें शामिल हों। यदि आप आ नहीं सकते, तो कम से कम एक दिन का अनशन रखकर शिक्षा, पारदर्शिता और रहने योग्य पर्यावरण की मांग वाले इस आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता जताएं। हम सभी को एक होकर देश को और बेहतर बनाना होगा।"
गत 20 जून से सीजेपी का यह आंदोलन शुरू हुआ है। प्राथमिक रूप से यह नीट (NEET), सीयूईटी (CUET), सीबीएसई (CBSE) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और घोटालों के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब इसने शिक्षा व्यवस्था के समग्र सुधार, सरकार की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर युवा पीढ़ी के एक स्वतःस्फूर्त आंदोलन का रूप ले लिया है।
दीपके ने बताया कि आंदोलन सिर्फ शिक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण भूमिका के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। सोमवार को बेबी और वृंदा करात की उपस्थिति ने इस आंदोलन को एक नया आयाम दिया है, ऐसा कई लोगों का मानना है। सीपीआई (एम) ने एक बयान में कहा है कि पार्टी न्याय की इस लड़ाई में युवा पीढ़ी के साथ पूरी तरह खड़ी रहेगी।
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साभार: गणशक्ति
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय
वांगचुक के अनशन का दूसरा दिन: सीपीआई (एम) ने दिया साथ रहने का संदेश
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय• प्रकाशित: 30 जून 2026 • 3 मिनट पठन
