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नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

केशव कुमार भट्टड़15 मई 20263 मिनट पठन183 बार पढ़ा गया

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है।  जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

नीट (NEET) पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे खेल का मुख्य आरोपी (किंगपिन) एक केमिस्ट्री का प्रोफेसर है, जो पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात रह चुका है।

कौन है यह मास्टरमाइंड?

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी पहुँच आसान थी।

कैसे फैलाया जाल?

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) ने सीबीआई सूत्रों के हवाले से बताया कि:

  • साजिश की शुरुआत: अप्रैल के आखिरी हफ्ते में पीवी कुलकर्णी ने एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से कुछ परीक्षार्थियों से संपर्क साधा था।
  • गिरफ्तारियाँ: इस मामले में गुरुवार तक जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
  • पुलिस हिरासत: इनमें से पांच को कोर्ट में पेश कर सात दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि दो अन्य को पुणे कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है।

कोचिंग की आड़ में खेल

  1. सीबीआई ने 14 मई को मनीषा वाघमारे को पुणे से गिरफ्तार किया था। वह अपने घर पर नीट परीक्षार्थियों के लिए स्पेशल कोचिंग क्लास चलाती थीं। जांच में पता चला है कि कोचिंग के दौरान छात्रों को हाथ से लिखे हुए प्रश्न और उनके सटीक उत्तर दिए गए थे। सीबीआई के मुताबिक, छात्रों की नोटबुक में मिले ये सवाल असली नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं।

देशभर में फैला नेटवर्क

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह के सदस्य सबसे पहले महाराष्ट्र के नासिक में मिले थे। वहां से लीक पेपर की एक कॉपी हरियाणा भेजी गई, जहां प्रश्नों के पांच अलग-अलग सेट तैयार किए गए। इसके बाद ये सेट राजस्थान के जयपुर, जमवारामगढ़ और सीकर भेजे गए। अंततः, इन प्रश्नपत्रों को आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, उत्तराखंड, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में फैला दिया गया।

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संबंधित खबर : प्रश्न पत्र लीक: नीट रद्द। जिम्मेदार कौन ?

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स्रोत :आनंदबाज़र.कॉम

अपलोडर: केशव कुमार भट्टड़

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प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ? नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैल गया था। पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है। प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं। ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़12 मई 2026

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न्यूज़क्लिक मामला! स्वतंत्र और जनपक्षीय मीडिया पर सरकार का हमला!कानून का घोर दुरुपयोग!

मामले का नाम: M/s PPK Newsclick Studio Pvt. Ltd. बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य।

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जून 2026 में, दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने न्यूज़क्लिक को बड़ी राहत दी। अदालत ने कहा कि शेयर मूल्यांकन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और फंड के इस्तेमाल से जुड़े आरोप कोई आपराधिक मामला (जैसे धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात) नहीं बनाते हैं। आधारभूत आरोप ही खारिज होने के कारण ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी स्वतः रद्द कर दिया गया।

स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को कोर्ट का संरक्षण

न्यूज़क्लिक पर हमला 2020-21 के आसपास हुआ — ठीक उस समय जब सरकार की कुछ नीतियों को लेकर विश्व स्तर पर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में यह संयोग नहीं, बल्कि चुनींदा निशाना था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 'न्यूज़क्लिक' पर लगे सारे आरोप बेबुनियाद थे। ताज्जुब करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर कोई ऊपरी सीमा (कैप) नहीं थी, फिर भी ED ने छापेमारी की! विदेशी निवेश पूरी तरह कानून के अनुसार था।

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धूर्तता इस बात में है कि सत्ता "राष्ट्रीय सुरक्षा" और "मनी लॉन्ड्रिंग" जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल करके असहमति की आवाज को कुचलने की कोशिश करती है। जब कोर्ट कहता है कि "कोई शिकायतकर्ता नहीं, कोई धोखा नहीं, कोई अपराध नहीं", तब साफ हो जाता है कि पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध और वैकल्पिक मीडिया को डराने का था।

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स्वतंत्र पत्रकारिता को केंद्र सरकार द्वारा प्रभावित करने के लिए चुनौती देना लोकतंत्र के लिए खतरा है — चाहे वो न्यूज़क्लिक हो या कोई और। लेकिन उसी के साथ, विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता भी जरूरी है। असली मुद्दा यह है कि कानून का चयनात्मक इस्तेमाल (selective application) हो रहा है। जो सत्ता के अनुकूल है, उसे छूट। जो आलोचना करता है, उसके खिलाफ पूरा तंत्र सक्रिय।

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हाईकोर्ट ने कानून की गरिमा बचाई, लेकिन सवाल बाकी है — कितने ऐसे केस हैं जो कोर्ट तक नहीं पहुँच पाते? और कितनी बार ED जैसी एजेंसियों को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है?

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ED की कार्यवाही न सिर्फ बुरी नीयत वाली थी, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला थी। यह नियमानुसार एक आर्थिक फैसला था, कोई अपराध नहीं था। पुलिस और ईडी का पूरा मामला कानून का घोर दुरुपयोग था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया।

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यह फैसला सिर्फ न्यूज़क्लिक की जीत नहीं, बल्कि असहमति के अधिकार की जीत है।

केशव कुमार भट्टड़12 जून 2026

राष्ट्रीय

संसद में हार, हवा में हमला — वामपक्ष ने मोदी पर दूरदर्शन के ‘दुरुपयोग’ का आरोप लगाया

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) ने चुनाव आयोग को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बावजूद सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन का इस्तेमाल कर राजनीतिक भाषण दिया। शिकायत में कहा गया कि 18 अप्रैल का संबोधन खुलकर राजनीतिक था, जिसमें विपक्षी दलों पर हमला किया गया और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। सीपीआई(एम) ने चुनाव आयोग से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के इस गंभीर उल्लंघन पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान सार्वजनिक प्रसारक को राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल करना निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के सिद्धांत को कमजोर करता है।

केशव कुमार भट्टड़19 अप्रैल 2026