"शेख मोहम्मद माफिक और उनके बेटे अब्दुल हाफिज पर हुआ यह नृशंस हमला सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में फैली अव्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को डराने और चुप कराने के मकसद से किया गया हमला है। हमारी शिक्षा व्यवस्था को कॉरपोरेट मुनाफे के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता। इस हत्याकांड में शामिल लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
एम.ए.बेबीसीपीआई (एम) के महासचिव
मुआवजा नहीं, पिता के नाम पर स्कूल चाहते हैं हाफिज
विरोध करने वालों को चुप कराने
के लिए हमला: एम.ए.बेबी
मृतक के घर पहुंचे CJP-SFI के नेता

बाँकुड़ा: सरकारी मुआवजे को खारिज करते हुए इंदास गांव के मृतक शेख मोहम्मद माफिक के बेटे अब्दुल हाफिज ने अपने पिता के नाम पर स्कूल की मांग की है। सोमवार को करिशुंडा गांव स्थित अपने घर पर SFI, DYFI के नेताओं और CJP के राष्ट्रीय नेतृत्व को साथ लेकर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की बात की थी, इसलिए मेरे पिता को अपनी जान गँवानी पड़ी। अब हम मुआवजे का क्या करेंगे? अगर सरकार सच में कुछ करना चाहती है, तो गाँव में पिता के नाम पर एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्कूल बनवा दे, जहाँ हिंदू-मुस्लिम सभी धर्मों के बच्चे पढ़ाई कर सकें।"
अब्दुल की माँ और मृतक की पत्नी हसीना बीबी ने भी कहा, "मेरे पति चले गए। क्या मुझे दुख नहीं हुआ? लेकिन मेरा बेटा मुआवजा पा ले और बाकी बच्चे अँधेरे में रहें, मैं ऐसा नहीं चाहती। हमें तो सभी के बारे में सोचना होगा।"
बीते 13 अगस्त को इसी परिवार पर इंदास ब्लाक के करिशुंडा गाँव के बीजेपी के उपद्रवियों ने रॉड और कटारी (धारदार हथियार) से जानलेवा हमला किया था। अब्दुल को बचाने के दौरान उनके पिता शेख मोहम्मद माफिक हमले का शिकार होकर अपनी जान गँवा बैठे। उस दिन की घटना को याद करते हुए हसीना बीबी ने कहा, "मारपीट के बाद भी वे पुलिस से कह रहे थे कि अब्दुल देशद्रोही है, बाहर के पैसों से काम कर रहा है, उसे गिरफ्तार किया जाए। मेरा बेटा देशद्रोही नहीं है।"
गरीब का घर, ईंटों की दीवारों पर अभी सीमेंट का प्लास्टर भी नहीं हुआ है; जमीन पर चटाई बिछाकर वामपंथी छात्र-युवा संगठनों के नेताओं के साथ बैठकर अब्दुल और उनकी माँ ने हत्यारों के लिए सख्त सजा की माँग की। उन्होंने अभी भी सुरक्षा की कमी महसूस होने की बात कही। छात्र-युवा नेताओं ने हसीना बीबी से कहा, "आपका बेटा देशद्रोही क्यों होगा? वह शिक्षा व्यवस्था की हालत सुधारने की लड़ाई का सिपाही है और उसके पिता उस संघर्ष के शहीद हैं। पूरा देश आपके साथ है।"
SFI के राज्य सचिव देबांजन दे, वामपंथी आंदोलन के नेता मयूख विश्वास और शतरूप घोष, CJP के नेता आशुतोष रांका तथा जिले के छात्र-युवा नेता उस दिन करिशुंडा गाँव पहुँचकर अब्दुल हाफिज और उनके परिवार से मिले। परिवार को सुरक्षा न मिलने के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए आशुतोष रांका ने पत्रकारों से कहा, "अस्पताल में भी पुलिस ने गुंडों को संरक्षण दिया। शुरुआत में पुलिस स्टेशन में परिवार को घुसने तक नहीं दिया गया। इंदास की पुलिस बीजेपी के गुंडों के पक्ष में काम कर रही है। अब्दुल के परिवार ने जिन उपद्रवियों की पहचान की है, उन्हें अभी तक पूरी तरह गिरफ्तार नहीं किया गया है। हम 10 दिनों का समय दे रहे हैं, इसके भीतर उन्हें गिरफ्तार करना होगा। वरना हम सब एक जुट होकर बांकुड़ा जिले के प्रशासनिक कार्यालय का घेराव करेंगे।"
CJP की ओर से उन्होंने यह भी कहा कि अब्दुल और उनके परिवार का दिल बहुत बड़ा है। अगर बंगाल सरकार में जरा भी शर्म बाकी है, तो गाँव में उनके पिता के नाम पर स्कूल बनवाए। अब्दुल के परिवार की मदद के लिए CJP की तरफ से आर्थिक मदद जुटाई जाएगी। अब्दुल पूरे बंगाल में 'स्कूल ठीक करो' अभियान का नेतृत्व करेंगे।
देबांजन दे ने पत्रकारों से कहा कि दिल्ली में आंदोलन के बाद गाँव लौटकर अब्दुल हाफिज अपने गाँव के प्राइमरी स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। उनके परिवार को देशद्रोही का ठप्पा लगाकर उनकी लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) की गई। बीजेपी यह नफरत का कल्चर फैला रही है। बीजेपी को लगता है कि इस हमले से युवा पीढ़ी को शिक्षा की लड़ाई से पीछे हटा देगी, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। न्याय छीनकर लाने के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। डर दिखाकर विरोध को दबाया नहीं जा सकता। अब्दुल जैसे लड़के राज्य के कोने-कोने में सवाल उठाने और स्कूलों को बचाने के लिए सामने आएंगे।
दूसरी ओर, इंदास की इस हत्याकांड की निंदा करते हुए दिल्ली से CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा, "शेख मोहम्मद माफिक और उनके बेटे अब्दुल हाफिज पर हुआ यह नृशंस हमला सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में फैली अव्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को डराने और चुप कराने के मकसद से किया गया हमला है। हमारी शिक्षा व्यवस्था को कॉरपोरेट मुनाफे के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता। इस हत्याकांड में शामिल लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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