उसी सुवेंदु ने तृणमूल का झंडा समेट कर अमित शाह के पैरों में डाल दिया। भाजपा का नेता बन गया। लेकिन लाल झंडे को खत्म नहीं कर सके, क्योंकि सीपीआई(एम) का एक आदर्श है। लक्ष्य है। कार्यक्रम है। यह किसी दादा-दीदी की पार्टी नहीं है।"
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जन समाचार मंच
धोखाधड़ी करने वालों को पकड़ने के बजाय गरीब मुसलमानों का आरक्षण खत्म कर रही है भाजपा: मोहम्मद सलीम
आतंक के गढ़ में खून से भीगा गांव का रास्ता आज गर्व के जनपथ में बदल गया। सोमवार की तपती दोपहर में सूरज का तेज भी लाल झंडा थामे जनसैलाब के हौसले के आगे हार मान गया। इसी दिन विधानसभा में 'गुंडा दमन बिल' पास हुआ है। इसी दिन हजारों लोगों की जनसभा को संबोधित करते हुए नानूर की धरती पर खड़े होकर सीपीआई(एम) के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलिम ने कहा, "आज के मुख्यमंत्री सुवेंदु (अधिकारी) पहले तृणमूल के नेता थे। माओवादियों को साथ लेकर किसने क्या किया था, किसने बारूदी सुरंग (लैंडमाइन), बंदूक, पिस्तौल, मशीनगन, स्टेनगन के बारे में कहा था, लाल झंडा क्यों, लाल कपड़े का टुकड़ा भी नहीं दिखने दिया जाएगा। उसी सुवेंदु ने तृणमूल का झंडा समेट कर अमित शाह के पैरों में डाल दिया। भाजपा का नेता बन गया। लेकिन लाल झंडे को खत्म नहीं कर सके, क्योंकि सीपीआई(एम) का एक आदर्श है। लक्ष्य है। कार्यक्रम है। यह किसी दादा-दीदी की पार्टी नहीं है।"
तृणमूल के हमले में बेरहमी से मारे गए नानूर के पूर्व विधायक कॉमरेड आनंद दास की स्मरण सभा आज माकपा के आह्वान पर आयोजित की गई थी। इस स्मरण सभा के लिए नानूर उच्च विद्यालय का मैदान मांगा गया था। स्कूल अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी। जबकि इसी स्कूल में पिछले तीन दिनों से आरएसएस (RSS) का प्रशिक्षण चल रहा है! नतीजतन, मजबूरी में एक वैकल्पिक मैदान चुना गया। लोगों ने उस मैदान को खचाखच भर दिया। सोमवार की तपती दोपहर में सूरज की तपिश लोगों की जिद के आगे हार मान गई। मंच पर मौजूद कॉमरेड आनंद दास की पत्नी हासी दास से लेकर शहीद कॉमरेड बादल शेख की पत्नी जरीना बीबी ही उस जिद की प्रेरणा बन गईं, जिन्होंने सब कुछ खोकर भी लाल झंडे का साथ नहीं छोड़ा।
उस दृढ़ और ओजस्वी जनसभा में खड़े होकर मोहम्मद सलिम ने विधानसभा में पास हुए ओबीसी बिल की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि आरएसएस उच्च जातियों की मनुवादी सोच वाला संगठन है। वे कभी भी ओबीसी के पक्ष में नहीं हैं, और पिछड़े मुसलमानों के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। इसीलिए आज उन्होंने कानून बनाकर बैकवर्ड क्लास कमीशन का कानून पलट दिया है और जो 10 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण था, उसे खत्म कर दिया है। लेकिन इस तरह से खत्म नहीं होता। हम अदालत गए थे। अदालत ने खारिज नहीं किया था। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल के लोगों ने एससी, एसटी, ओबीसी प्रमाणपत्रों के मामले में अनियमितताएं की थीं। पैसे लेकर कई फर्जी और नकली सर्टिफिकेट दिए गए थे। जिन्होंने नकली सर्टिफिकेट दिए हैं और जो अधिकारी इसमें शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिनके पास नकली सर्टिफिकेट हैं, उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। उसके बजाय इस सरकार ने आरक्षण ही रद्द कर दिया। ऐसा नहीं हो सकता। हम कह रहे हैं, जालसाजों को पकड़ो। लेकिन भाजपा जालसाजों को न पकड़कर, आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े गरीब मुसलमानों का आरक्षण ही बंद कर रही है।"
इस दिन रैली से पहले नानूर बीडीओ ऑफिस से एक विशाल जुलूस नानूर बस स्टैंड होते हुए सभा स्थल पर पहुंचा। उस जुलूस ने एसआईआर के नाम पर अनुचित तरीके से भारी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। उस आक्रोश के साथ एकजुट होते हुए सभा में खड़े होकर मोहम्मद सलिम ने फिर कहा, "हटाए गए प्रत्येक व्यक्ति के नाम को लेकर हम ट्रिब्यूनल से हाईकोर्ट, और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे। हम वोट का अधिकार, लोकतांत्रिक अधिकार, मानवाधिकार और संविधान के अधिकार की रक्षा करेंगे।"
सभा से न केवल अधिकारों की रक्षा का संदेश मिला, बल्कि शहीद बादल शेख और शहीद आनंद दास की पत्नियों ने भी न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने साफ कहा कि वे अपने पतियों की नृशंस हत्या का न्याय चाहती हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि इसी नानूर में तृणमूल नेता काजल शेख ने खुद को एक बेताज बादशाह बना लिया था। आज काजल और उसके साथी फरार हैं। इलाके में किसी की चोटी तक दिखाई नहीं दे रही है। जुलूस में चल रहीं शियाला की सुतुरा बीबी या शेरपुर की राइना बीबी ने कहा, "उन तृणमूल के कुछ मठाधीशों को अब देख रही हूँ कि वे भाजपा की तरफ खूब चक्कर काट रहे हैं। आज भी हमारे जुलूस के रास्ते में वे मोटरसाइकिल से चक्कर काट रहे थे। आने दो एक बार कुछ बोलने के लिए। पता चल जाएगा।" महिलाओं की इस बात का हवाला देते हुए मोहम्मद सलिम ने कहा, "तृणमूल के काजल को भाजपा की आंखों का तारा बनाकर भी वे बच नहीं पाएंगे। जनता ही सबका जवाब देगी।"
सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की सदस्य श्यामली प्रधान की अध्यक्षता में यह रैली आयोजित हुई। इसमें पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य डॉ. रामचंद्र डोम उपस्थित थे। रैली में शामिल वकील सब्यसाची चटर्जी ने कहा, "नानूर में मारे गए कुरबान शेख से लेकर बादल शेख, आनंद दास की फाइलें भी खोली जाएंगी। अदालत में ही फिर से मुलाकात होगी।" रैली में पार्टी की बीरभूम जिला कमेटी के सचिव गौतम घोष ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "तृणमूल गायब हो गई है। भाजपा ने उसकी जगह ले ली है। भाजपा आज जो 'हिंदू-हिंदू' का शोर मचा रही है, जल्द ही यह साबित हो जाएगा कि भाजपा अमीरों के अलावा और किसी की पार्टी नहीं है। हमारी लड़ाई जाति और धर्म से ऊपर उठकर शोषित लोगों के लिए है।"
बोलपुर में दिवंगत रमाप्रसाद बंद्योपाध्याय की स्मृति में उनके पुत्र प्रोफेसर नीलांजन बंद्योपाध्याय ने इस रैली से पहले 'ज्योति बसु समाज चर्चा एवं अनुसंधान केंद्र' के लिए 10 हजार रुपये और सीपीआई(एम) के संग्रामी कोष के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मोहम्मद सलिम के हाथों में सौंपी।
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साभार: गणशक्ति
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय
धोखाधड़ी करने वालों को पकड़ने के बजाय गरीब मुसलमानों का आरक्षण खत्म कर रही है भाजपा: मोहम्मद सलीम
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय• प्रकाशित: 30 जून 2026 • 5 मिनट पठन
