धार्मिक अल्पसंख्यकों को संकट में डालने के लिए आरएसएस की योजना के अनुसार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की संयुक्त गतिविधियों के क्रियान्वयन को समझाते हुए सलीम ने कहा कि देश के विभाजन का दंश झेलने के बावजूद पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक विभाजन नहीं था। लेकिन पंद्रह वर्षों में ममता बनर्जी के कुशासन के खिलाफ लोगों में जो गुस्सा पैदा हुआ था, भाजपा ने उसे तृणमूल विरोधी गुस्से के बजाय मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक गुस्से में बदल दिया।
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जन समाचार मंच
अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है संघ-भाजपा: मोहम्मद सलीम
अतीत में वाजपेयी-आडवाणी के दौर में जो भाजपा का गुप्त एजेंडा था, अब मोदी-शाह के शासन में वह खुलकर सामने आ गया है। भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनकर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर आरएसएस-भाजपा रखना चाहती हैं।। रविवार को 'आवाज' राज्य कमेटी की ओर से कोलकाता के हरेकृष्ण कोनार स्मृति भवन में आयोजित 'अल्पसंख्यकों के अधिकार और सुरक्षा का सवाल' विषय पर आयोजित सेमिनार में में सीपीआई(एम) के राज्य सचिव और 'आवाज' के सलाहकार मोहम्मद सलीम ने यह बात कही।
इजरायल के शासकों के साथ भारत के शासक दल की वैचारिक समानता का उल्लेख करते हुए सलीम ने कहा कि आर्थिक समस्याओं का समाधान किए बिना घुसपैठिए, रोहिंग्या, बांग्लादेशी जैसी बातें कहकर देश के भीतर ही एक हिस्से को दूसरे हिस्से के सामने 'दुश्मन' के रूप में पेश किया जा रहा है। जनसांख्यिकी परिवर्तन रोकने के नाम पर 'पुशबैक' (वापस भेजने) की धमकी दी जा रही है। बड़ी संख्या में पुशबैक करना बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है, कुछ लोगों को ऐसा करने की कोशिश में ही सरकार के पसीने छूट रहे हैं । असली बात यह है कि आरएसएस भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनकर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहता है। इजरायल ने जिस तरह फिलिस्तीनियों को अपनी ही जमीन पर बेगाना बना रखा है, उसी तरह आरएसएस-भाजपा भारत के अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनना चाहती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस हमले के खिलाफ प्रतिरोध की लड़ाई को किसी एक समुदाय की लड़ाई के रूप में न देखकर, सभी के नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई के रूप में देखने की अपील सलीम ने की। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी जंग से नहीं होगा। सभी को साथ लेकर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष खड़ा करना होगा। सांप्रदायिक नफरत के प्रचार से वे हमारे मन के मानवीय पहलुओं को दानवीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हॉकरों को हटाने की समस्याओं को न देखकर, लोगों को हिंदू-मुस्लिम, बंगाली-गैर-बंगाली दिखाकर उन्हें क्रूरता की ओर धकेला जा रहा है। इसलिए इसके प्रतिरोध में सांस्कृतिक पहल की भी आवश्यकता है।
इस अवसर पर 'आवाज' के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में पूर्व सांसद व अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य, सीपीआई (एम) के विधायक मोस्ताफिजुर रहमान और 'आवाज' के राज्य सचिव रुहुल अमीन गाजी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राज्य अध्यक्ष सैदुल हक ने की।
सभा में विकास भट्टाचार्य ने कहा कि एनआरसी (एसआईआर) में केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि कई गरीब हिंदू लोग भी संकट में पड़े हैं। अब नागरिकता पर सवाल उठाकर उनके नागरिक अधिकार छीनने की कोशिश हुई, तो राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ हमारी कानूनी लड़ाई भी जारी रहेगी। मुस्तफीजुर रहमान ने कहा कि सभी गरीब लोगों के अधिकारों की रक्षा के संघर्ष को तेज करके ही अल्पसंख्यकों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। फासीवादियों के खिलाफ लड़ाई सबको एकजुट करके ही लड़नी होगी।
पश्चिम बंगाल की सरकार में भाजपा के सत्तारूढ़ होने से बदले राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस आरएसएस का एक राजनीतिक प्रोजेक्ट था। पंद्रह वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस ने सब कुछ तहस-नहस करके और लूट-खसोट मचाकर आरएसएस का रास्ता साफ किया और उनके प्रोजेक्ट को लागू किया। अब तृणमूल कांग्रेस गायब हो रही है, पार्टी के विधायक और सांसद पाला बदल रहे हैं। और भाजपा सरकार को तो असल में तृणमूल के ही पूर्व नेता चला रहे हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नजरों में नम्बर बढ़ाने के लिए वे और ज्यादा हिंदुत्व की आक्रामकता दिखा रहे हैं।
धार्मिक अल्पसंख्यकों को संकट में डालने के लिए आरएसएस की योजना के अनुसार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की संयुक्त गतिविधियों के क्रियान्वयन को समझाते हुए सलीम ने कहा कि देश के विभाजन का दंश झेलने के बावजूद पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक विभाजन नहीं था। लेकिन पंद्रह वर्षों में ममता बनर्जी के कुशासन के खिलाफ लोगों में जो गुस्सा पैदा हुआ था, भाजपा ने उसे तृणमूल विरोधी गुस्से के बजाय मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक गुस्से में बदल दिया। एक तरफ ममता बनर्जी ने हिजाब पहनकर इमाम बरकती और सिद्दीकुल्लाह चौधरी को साथ लेकर मुसलमानों को धोखा दिया, तो दूसरी तरफ भाजपा ने मीडिया के जरिए शाहजहां और जहांगीर जैसे चेहरों को लुटेरी तृणमूल कांग्रेस के मुख्य चेहरे के रूप में प्रचारित किया। जबकि अनुब्रत मंडल, पार्थ चटर्जी और ज्योतिप्रिय मल्लिक जैसे नेता जो इन लुटेरों के असली आका थे, उन्हें नहीं दिखाया गया। इसका कारण भ्रष्टाचार को खत्म करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक विभाजन ही भाजपा का मुख्य लक्ष्य है।
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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय
अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है संघ-भाजपा: मोहम्मद सलीम
अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय• प्रकाशित: 29 जून 2026 • 4 मिनट पठन
