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बार-बार शिकायत के बावजूद दागियों के खिलाफ नहीं की गई कोई कार्रवाई: मोहम्मद सलीम ने सबूत देकर बताया

राजीव कुमार पाण्डेय25 जून 20266 मिनट पठन15 बार पढ़ा गया

सरफराज आलम द्वारा जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि उन्होंने फरवरी-मार्च के महीने में ही सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कोलकाता बंदरगाह प्राधिकरण से पूछा था कि तारातल्ला के दुर्घटनास्थल की जमीन पर निर्माण कौन कर रहा है, जमीन किसे लीज पर दी गई है और क्या इसके लिए एनओसी (NOC) दी गई है। लेकिन आरटीआई के तहत उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

बार-बार शिकायत के बावजूद दागियों के खिलाफ नहीं की गई कोई कार्रवाई: मोहम्मद सलीम ने सबूत देकर बताया

कोलकाता बंदरगाह (पोर्ट) प्राधिकरण और यहां तक कि जहाजरानी मंत्रालय को भी बहुत पहले ही बंदरगाह की जमीन पर अवैध निर्माण की शिकायत कर दी गई थी। लेकिन अवैध कारोबार करने वाली संस्था 'बेहरा ब्रदर्स' और उनके दागी ठेकेदार के खिलाफ किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। बुधवार शाम को सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने शिकायत पत्र के सबूतों के साथ यह आरोप लगाया है।

सीआईटीयू  से संबद्ध कोलकाता डॉक लेबर बोर्ड वर्कमैन यूनियन की ओर से कोलकाता बंदरगाह के चेयरमैन और जहाजरानी मंत्रालय को भेजे गए शिकायत पत्रों को जारी करते हुए सलीम ने कहा कि कोलकाता बंदरगाह की जमीन पर कौन और कैसे अवैध निर्माण कार्य चला रहा है, इसकी बार-बार जानकारी देने के बावजूद कोलकाता बंदरगाह या कोलकाता नगर निगम  किसी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विपरीत, तथ्यों को दबाकर अपराध को छिपाने की कोशिश की गई। अब वहीं एक भयानक हादसे में लोगों की जान चली गई है।

सीपीआई (एम) नेता फैयाज अहमद खान ने भी कहा कि बंदरगाह इलाके में एक के बाद एक जमीनें अवैध कारोबारियों को लीज पर दे दी गई हैं। लीज धारक भले ही अवैध निर्माण कर रहे हों, लेकिन बंदरगाह प्राधिकरण या कोलकाता नगर निगम कोई भी इस पर निगरानी रखकर इसे रोकने का इंतजाम नहीं कर रहा है।

तारातल्ला में आज जिस प्लॉट पर गोदाम का निर्माणाधीन शेड गिरने से कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं, उसके पीछे केंद्र सरकार के बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय, कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर फिरहाद हाकीम सहित स्थानीय तृणमूल-कांग्रेस नेताओं की मिलीभगत सामने आई है। यह खुलासा सीआईटीयू नेता सरफराज आलम द्वारा भेजे गए कई पत्रों से हुआ है। सरफराज आलम कोलकाता डॉक लेबर बोर्ड वर्कमैन यूनियन के अध्यक्ष हैं और बंदरगाह इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक मुखर प्रदर्शनकारी हैं। असगर हुसैन नाम के तृणमूल कांग्रेस के करीबी जिस ठेकेदार का नाम आज के ढहे हुए शेड के निर्माण कार्य से जुड़ा है, उसके द्वारा बनाई गई कई इमारतों के खिलाफ सरफराज आलम ने हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया था। हाईकोर्ट ने ऐसी 5 इमारतों को अवैध भी घोषित कर दिया है। लेकिन इसके बदले सरफराज आलम को बार-बार सिर्फ धमकियों का ही सामना करना पड़ा। 

सरफराज आलम द्वारा जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि उन्होंने फरवरी-मार्च के महीने में ही सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कोलकाता बंदरगाह प्राधिकरण से पूछा था कि तारातल्ला के दुर्घटनास्थल की जमीन पर निर्माण कौन कर रहा है, जमीन किसे लीज पर दी गई है और क्या इसके लिए एनओसी (NOC) दी गई है। लेकिन आरटीआई के तहत उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया। केंद्रीय सूचना आयुक्त से शिकायत करने के बाद भी सरफराज आलम को कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद बंदरगाह के डॉक श्रमिक आंदोलन से जुड़े होने के कारण, सरफराज आलम ने खुद भ्रष्टाचार विरोधी कर्मचारियों से जानकारी निकलवाई।

उस जानकारी का हवाला देते हुए जब उन्होंने दोबारा पत्र लिखा, तब कोलकाता बंदरगाह के एस्टेट मैनेजर ने उन्हें बताया कि हां, जमीन 'बेहरा ब्रदर्स' नाम की संस्था को लीज पर दी गई है। हालांकि, निर्माण कार्य से संबंधित एनओसी दी गई है या नहीं, इस बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया।

सरफराज आलम ने पिछले 11 मई को कोलकाता बंदरगाह के चेयरमैन और बंदरगाह जहाजरानी मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी को पत्र लिखकर कहा था कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट रोड के प्लॉट नंबर डी-247/3 (जो बंदरगाह के अधीन है) की जमीन के लीज से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएं। आधिकारिक लीज सूची के 1092 नंबर पर बेहरा ब्रदर्स का नाम है, यह जमीन पहले 'ऑक्टेवियस टी' के नाम पर लीज पर थी। उस जमीन पर निर्माण कार्य की एनओसी, बिल्डिंग प्लान और मंजूरी से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए। हमें पता चला है कि बेहरा ब्रदर्स ने असगर हुसैन नाम के एक ठेकेदार को निर्माण की जिम्मेदारी दी है। पिछले 2025 के 17 सितंबर को इस व्यक्ति के खिलाफ कोलकाता बंदरगाह की जमीन पर कंक्रीट का निर्माण कर अवैध पार्किंग का कारोबार चलाने की शिकायत दर्ज हुई है। ऐसे व्यक्ति को बंदरगाह की जमीन पर निर्माण की अनुमति देना चिंताजनक है, बंदरगाह को तुरंत इस पर निगरानी रखनी चाहिए। हमारी यूनियन की मांग है कि जांच और वैधता की पुष्टि होने तक उस निर्माण को रोक दिया जाए। जनहित और जनता की मूल्यवान संपत्ति की रक्षा के लिए बंदरगाह को यह कदम तुरंत उठाना चाहिए।

हादसे की खबर मिलते ही सरफराज आलम मौके पर पहुंचे। आज उन्होंने बेहद हताश होकर कहा,"जिस अवैध काम को सीबीआई (CBI) जांच कराकर बंद कर दिया जाना चाहिए था, उसे धड़ल्ले से चलने देने के कारण आज ऐसा हादसा हो गया। जो लोग यह अवैध निर्माण कर रहे थे, वे बंदरगाह इलाके के तृणमूल-कांग्रेस के वोट-लुटेरों के खास गिरोह के लोग हैं। लेकिन बंदरगाह प्राधिकरण को बार-बार सूचित करने के बाद भी उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की? कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने अपनी जमीन पर निगरानी रखने के लिए लाखों रुपये वेतन वाले इंस्पेक्टर रखे हैं, फिर उनका क्या मतलब रह गया? सूचना के अधिकार कानून को जिस पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बनाया गया था, वह कहां चली गई?"

मोहम्मद सलीम ने पत्रकारों से कहा कि रेलवे अधिकारियों की तरह ही कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने भी बंदरगाह के विकास के लिए भारी मात्रा में जमीन ली थी। अगर बंदरगाह के काम में इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो वे जमीन लोगों को वापस कर दें। उसके बजाय बंदरगाह प्राधिकरण निजी और कॉर्पोरेट कंपनियों को जमीन लीज पर देकर पैसे कमा रहा है। रेलवे और एयरपोर्ट अथॉरिटी भी यही काम कर रहे हैं। हॉकरों को बेदखल कर बड़े व्यापारियों को जमीन लीज पर देकर शॉपिंग मॉल बनवाए जा रहे हैं।केंद्रीय एजेंसियों को व्यापारियों को लीज पर देने के लिए जमीन नहीं दी गई थी।जमीन लीज पर देने मात्र से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उस जमीन पर कोई अवैध निर्माण हो रहा है या नहीं, यह देखना भी बंदरगाह प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। उन्होंने दोनों में से कुछ भी नहीं किया। यहां तक कि सीआईटीयू नेतृत्व द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

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