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श्रमजीवियों पर हमला, प्रतिरोध में उतरने का आह्वान

राजीव कुमार पाण्डेय22 जून 20263 मिनट पठन2 बार पढ़ा गया

जब बुलडोजर चलता है तो कोई धर्म या जाति नहीं देखी जाती। उस समय केवल दो ही श्रेणियां सामने होती हैं— कॉरपोरेट और गरीब। नतीजतन, जब बुलडोजर चलता है, तो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग प्रभावित होते हैं।

श्रमजीवियों पर हमला, प्रतिरोध में उतरने का आह्वान

चुनाव से पहले मताधिकार सहित नागरिकता छीन ली गई थी, और चुनाव के बाद के समय में रोजी-रोटी पर हमला किया जा रहा है। हॉकरों को हटाने (उच्छेद) के समय भी वामपंथी ही संकटग्रस्त लोगों के साथ खड़े रहे हैं। यह काम केवल वामपंथी ही कर सकते हैं। इसलिए सभी को एकजुट कर प्रतिरोध की रैली में शामिल करना ही अब एकमात्र लक्ष्य है। रविवार को पांशकुड़ा में एक सभा में माकपा (सीपीआई-एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही।

इस दिन रबींद्र नजरूल सदन में पार्टी की पांशकुड़ा जोनल संगठनात्मक समिति के आह्वान पर एक आम सभा आयोजित की गई। मोहम्मद सलीम, पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती और पूर्व मेदिनीपुर जिला समिति के सचिव निरंजन सिंगी ने वर्तमान समय में माकपा के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के कर्तव्यों पर चर्चा की। इस अवसर पर इब्राहिम अली, महादेव माइती, निताई सामंतराय, शेख शहाजुद्दीन, नाजिर हुसैन सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

इस दिन मोहम्मद सलीम ने कहा कि एसईआईआर (SEIR) चरण के दौरान लाखों वैध लोगों के नाम सूची से छूट गए थे। शुरुआत से ही माकपा की मांग थी कि वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं। लेकिन चुनाव लाखों वैध मतदाताओं को बाहर रखकर ही आयोजित किया गया। जब तक उन सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो जाते, तब तक लड़ाई से पीछे नहीं हटा जा सकता। इस लड़ाई को जारी रखना ही होगा। नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए माकपा कार्यकर्ताओं को अग्रिम पंक्ति में रहना होगा।

मोहम्मद सलीम ने आगे कहा कि पिछले चुनाव में भाजपा कॉरपोरेट्स के सहयोग से जीती है। नतीजतन, सत्ता में आने के बाद भाजपा कैबिनेट उनके हितों को पूरा करने के लिए तत्पर है। गरीब हॉकरों को अंधाधुंध बेदखल किया जा रहा है। रात के अंधेरे में बुलडोजर चलाकर दुकानों को तोड़कर जमींदोज कर दिया गया है। एकमात्र वामपंथी ही इसके खिलाफ प्रतिरोध की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह लड़ाई जितनी सड़कों पर हुई है, उतनी ही अदालत में भी लड़ी गई है। उन्होंने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि जब बुलडोजर चलता है तो कोई धर्म या जाति नहीं देखी जाती। उस समय केवल दो ही श्रेणियां सामने होती हैं— कॉरपोरेट और गरीब। नतीजतन, जब बुलडोजर चलता है, तो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग प्रभावित होते हैं।

इस दिन सलीम ने यह भी कहा कि चुनाव में हार-जीत से एक अंतर पैदा होता है, लेकिन वह स्थायी नहीं होता। वामपंथियों का जो प्राथमिक काम है, उसे निरंतर करते रहना होगा। श्रमजीवी वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा करना ही एकमात्र लक्ष्य है। इसलिए, जहां भी श्रमजीवी लोगों पर हमला होगा, वहां हमें प्रतिरोध के लिए आगे रहना होगा।

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साभार: गणशक्ति

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

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